Bhopal Master Plan : सरकार के लिए परेशानी बनता जा रहा भोपाल का मास्टर प्लान
Bhopal Master Plan : सरकार के लिए टेढ़ी खीर बनता जा रहा भोपाल का मास्टर प्लान आखिर कब लागू होगा, यह अब भी सवाल बना हुआ है। तारीख पर तारीख मिलती गई और आगे बढ़ीं, ड्राफ्ट भी बना, लेकिन जमीन पर मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ। मास्टर प्लान के देरी होने की वजह यह है की नेताओं में दूर दृष्टि की कमी है, अपने हित के लिए मास्टर प्लान को डिले कर रहे है। यह कहना है विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों का।
मास्टर प्लान शहर के लिए जरूरी
क्रेडाई भोपाल के पूर्व अध्यक्ष विपिन गोयल ने कहा कि मास्टर प्लान किसी भी बड़े या मध्यम शहर के लिए जरूरी है। भोपाल तो फिर भी राजधानी है। शहर में कहां व्यापार होगा, कहां आबादी रहेगी, कहां खेती होगी यह मास्टर प्लान में तय होता है। आज नहीं 30 साल बाद भी विकास कैसे होगा यह भी मास्टर प्लान में तय होता है। इसके लिए मुख्य रूप से शासन जिम्मेदार है, लोगों का हित स्वार्थ इसमें आड़े आता है।
अमलीजामा पहनाने से पहले ही आए अड़ंगे
इस संदर्भ में वेस्टर्न ग्रुप के पी.राजू ने कहना है कि देश की सबसे साफ राजधानी प्लानिंग में 20 साल पीछे हैं, क्योंकि 1995 के बाद से भोपाल में मास्टर प्लान लागू ही नहीं हुआ। कई बार ड्राफ्ट बना, सरकारें बदली, लेकिन मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जमीन पर नहीं उतरा। अब तक चार बार भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी हुआ, लेकिन अमलीजामा पहनाने से पहले ही इतने अड़ंगे आए कि सरकार को न चाहते हुए भी इसे रद्द करना पड़ा। मास्टर प्लान लागू न हो पाने की वजह से भोपाल में मनमाने तरीके से विकास हो रहा है।
लोगों को आज भी इंतजार
कर सलाहकार राजेश जैन ने कहा कि सरकार के लिए टेढ़ी खीर बनता जा रहा भोपाल का मास्टर प्लान आखिर कब लागू होगा यह अब भी सवाल बना हुआ है। भोपाल के लोगों को आज भी इंतजार है राजधानी का सुनियोजित विकास कब होगा। जैन के अनुसार नेता और अधिकारी मिलकर मास्टर प्लान को प्रभावित कर रहे हैं।
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